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  • नेपाल ने रुबेला से पूरी तरह पाई मुक्ति – WHO

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया है कि नेपाल ने रुबेला को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त कर दिया है. यह इस हिमालयी राष्ट्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिसने एक दशक से अधिक समय तक बच्चों और माताओं की सुरक्षा की ख़ातिर अपने टीकाकरण तंत्र को मज़बूत किया है.

  • बच्चों को शारीरिक दंड देने में किसी का भी फ़ायदा नहीं, WHO

    दुनिया भर में 18 साल से कम उम्र के आधे से ज़्यादा बच्चे, हर साल किसी न किसी रूप में शारीरिक दंड (corporal punishment) का सामना करते हैं, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है, अलबत्ता इससे किसी को कोई लाभ नहीं होता.

  • SDG-2: वर्ष 2030 तक भूख-मुक्त दुनिया का लक्ष्य, आसान या मुश्किल?

    ये बहुत सोचने वाली बात है कि 21वीं सदी में भी करोड़ों लोग भूखे क्यों जीवन गुज़ारते हैं? जबकि हर दिन लगभग एक अरब भोजन थालियों के बराबर खाद्य सामग्री बर्बाद कर दी जाती है. यह एक कड़वी सच्चाई है कि जब दुनिया तकनीक, अन्तरिक्ष यात्रा और कृत्रिम बुद्धिमता (AI) के साथ नई ऊँचाइयों को छू रही है, तब भी करोड़ों लोगों को भरपेट भोजन नहीं मिल पा रहा है. सतत विकास लक्ष्य – 2 इसी समस्या पर नज़र टिकाता है.

  • चरम गर्मी से श्रमिकों के स्वास्थ्य और आजीविका पर बढ़ता ख़तरा

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने आगाह किया है कि दुनिया भर में चरम गर्मी (Extreme heat) अब श्रमिकों के स्वास्थ्य और आजीविका के लिए, दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुकी है.

  • त्वचा निखारने का दावा करने वाले विषाक्त उत्पादों पर अंकुश की उम्मीद

    अफ़्रीका, एशिया और कैरीबियाई क्षेत्र में स्थित देशों में, त्वचा को चमकाने का दावा करने वाले उत्पादों में पारे (mercury) का व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता रहा है, जोकि ख़तरनाक है. हाल ही में एक अहम सन्धि के तहत, प्रसाधन उत्पादों में पारे के इस्तेमाल पर पाबन्दी लगाई गई है, जिसे अनेक अफ़्रीकी देशों ने भी अपनाया है. इस पृष्ठभूमि में, स्वास्थ्य विशेषज्ञों व पीड़ितों ने सभी देशों से इन नियमों को ज़मीनी स्तर पर सख़्ती से लागू किए जाने की अपील की है.

  • भूख में राहत के लिए WFP और भारत की खाद्य साझेदारी

    विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और भारत ने वैश्विक भूख संकट से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता किया है जिसके तहत, खाद्य सुरक्षा में सहयोग को मज़बूत किया जाएगा और इसकी शुरुआत पोषक तत्वों से समृद्ध चावल की आपूर्ति से होगी. 

  • SDG-3: सभी के स्वास्थ्य सपनों को पूरा करने का लक्ष्य, कितनी दूर है मंज़िल

    कल्पना कीजिए एक ऐसी दुनिया की, जहाँ हर बच्चा सुरक्षित जन्म ले, हर महिला को समय पर, बिना किसी परेशानी के प्रसव सुविधा मिले, हर व्यक्ति को बिना किसी आर्थिक बोझ के दवाइयाँ और टीके उपलब्ध हों, और कोई भी इनसान केवल बीमारी की वजह से ग़रीबी में न धकेला जाए. यही सपना है सतत विकास लक्ष्य 3 (SDG Goal 3) का: सभी के लिए स्वास्थ्य और कल्याण.

  • एक अरब से अधिक लोग मानसिक स्वास्थ्य अवस्था की चपेट में, WHO की चेतावनी

    विश्व भर में एक अरब से अधिक लोग, मानसिक स्वास्थ्य अवस्था में जीवन गुज़ार रहे हैं, जिसका व्यक्तियों, परिवारों और अर्थव्यवस्थाओं पर गहरा असर हो रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा मंगलवार को जारी नए आँकड़ों के अनुसार, इस चिन्ताजनक स्थिति के बावजूद अधिकाँश देश पर्याप्त समर्थन मुहैया करा पाने में विफल साबित हो रहे हैं.

  • डीआर काँगो: इबोला वायरस का नया प्रकोप, 15 संक्रमितों की गई जान

    काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में स्वास्थ्य अधिकारियों ने, देश के कसाई प्रान्त में इबोला महामारी के नए प्रकोप की घोषणा की है. गुरुवार तक यहाँ 28 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और 15 मौतों की ख़बर है, जिनमें 4 स्वास्थ्यकर्मी हैं.

  • वो रात जब पहाड़ दहल उठे: अफ़ग़ानिस्तान में भूकम्प पीड़ितों की सेवा में जुटे एक डॉक्टर की आपबीती

    मध्य रात्रि के क़रीब आए भूकम्प के पहले झटके ने ​डॉक्टर अब्दुल मतीन सहक को उनके बिस्तर से नीचे गिरा दिया. दूसरा तेज़ झटका महसूस होने के बाद, उन्होंने लपक कर अपना फ़ोन उठा लिया. ये 31 अगस्त को हुआ, जब पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान का पर्वतीय क्षेत्र रिक्टर पैमाने पर 6.0 की तीव्रता वाले भूकम्प से दहल उठा. उसके बाद भी रुक-रुककर अनेक झटके महसूस किए जाते रहे.